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Thursday, January 21, 2021
Wednesday, January 13, 2021
Sunday, January 3, 2021
तुम्हारे विकास के मंदिर आदिवासियों की कब्रगाह:जयपाल सिंह मुंडा
महान, दूरदर्शी और विद्वान नेता, सामाजिक न्याय के आरंभिक पक्षधरों में से एक, संविधान सभा के सदस्य और हॉकी के बेहतरीन खिलाड़ी जयपाल सिंह मुंडा का योगदान भारत की जनजातियों के लिए वही है, जो बाबा साहब अंबेडकर का अनुसूचित जातियों के लिए है। आदिवासियों के लिहाज़ से कई मायनों में जयपाल सिंह मुंडा के योगदान उनसे ज्यादा भी कहा जा सकता है।
1928 के एमस्टर्डम ओलंपिक खेलों में भारत को पहली बार हॉकी का स्वर्ण पदक दिलाने वाली टीम के कप्तान जयपाल सिंह मुंडा ही थे। ये अलग बात है कि उनके व्यक्तित्व और योगदान खिलाड़ी के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी इतना ही महान है। उनकी शैक्षणिक विद्वता का एक प्रमाण यह भी है कि उन्होंने जिस साल भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया, उसी साल उन्होंने आईसीएस की परीक्षा भी पास करके दिखाई।
आदिवासी परिवार में 3 जनवरी, 1903 को राँची जिले के खुंटी सब डिवीज़न में तपकरा गाँव में जन्मे जयपाल सिंह मुंडा ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और उसी दौरान हॉकी की अपनी प्रतिभा दिखाकर लोगों को चमत्कृत करना शुरू कर दिया था। इसी कारण उन्हें भारतीय हॉकी टीम की ओलंपिक में कप्तानी सौंपी गई थी।
बाद में, ईसाई मिशनरी उन्हें भारत में धार्मिक प्रचार के काम में लगाना चाहते थे, लेकिन जयपाल सिंह ने आदिवासियों के उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित करने का फैसला किया। मरांग गोमके यानी ग्रेट लीडर के नाम से लोकप्रिय हुए जयपाल सिंह मुंडा ने 1938-39 में अखिल भारतीय आदिवासी महासभा का गठन करके आदिवासियों के शोषण के विरुद्ध राजनीतिक और सामाजिक लड़ाई लड़ने का निश्चय किया।
मध्य-पूर्वी भारत में आदिवासियों को शोषण से बचाने के लिए उन्होंने अलग आदिवासी राज्य बनाने की माँग की। उनके प्रस्तावित राज्य में वर्तमान झारखंड, उड़ीसा का उत्तरी भाग, छत्तीसगढ़ और बंगाल के कुछ हिस्से शामिल थे। उनकी माँग पूरी नहीं हुई, जिसका नतीजा यह रहा कि इन इलाकों में शोषण के खिलाफ नक्सलवाद जैसी समस्याएँ पैदा हुईं, जो आज तक देश के लिए परेशानी बनी हुई है। हालाँकि करीब साठ साल बाद वर्ष 2000 में झारखंड राज्य के निर्माण के साथ उनकी माँग आंशिक रूप से पूरी हुई, लेकिन तब तक आदवासियों की संख्या राज्य में घटकर करीब 26 फीसदी बची, जबकि 1951 में ये आबादी 51 फीसदी हुआ करती थी।
जयपाल सिंह मुंडा आदिवासियों के लिए सबसे बड़े पैरोकार बनकर उभरे। संविधान सभा के लिए जब वे बिहार प्रांत से निर्वाचित हुए तो उन्होंने आदिवासियों की भागीदारी सुनिश्चित कराने के लिए कड़े प्रयास किए।
अगस्त 1947 में जब अल्पसंख्यकों और वंचितों के अधिकारों पर पहली रिपोर्ट प्रकाशित ही तो उसमें केवल दलितों के लिए ही विशेष प्रावधान किए गए थे। दलित अधिकारों के लिए डॉ अंबेडकर बहुत ताकतवर नेता बन चुके थे, जिसका लाभ दलितों को तो मिलता दिख रहा था, लेकिन आदिवासियों को अनदेखा किया जा रहा था। ऐसे में जयपाल सिंह मुंडा ने कड़े तेवर दिखाए और संविधान सभा में ज़ोरदार भाषण दिया।
“आज़ादी की इस लड़ाई में हम सबको एक साथ चलना चाहिए। पिछले छह हजार साल से अगर इस देश में किसी का शोषण हुआ है तो वे आदिवासी ही हैं। उन्हें मैदानों से खदेड़कर जंगलों में धकेल दिया गया और हर तरह से प्रताड़ित किया गया, लेकिन अब जब भारत अपने इतिहास में एक नया अध्याय शुरू कर रहा है तो हमें अवसरों की समानता मिलनी चाहिए।”
जयपाल सिंह के सशक्त हस्तक्षेप के बाद संविधान सभा को आदिवासियों के बारे में सोचने पर मजबूर होना पड़ा। इसका नतीजा यह निकला कि 400 आदिवासी समूहों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया गया। उस समय इनकी आबादी करीब 7 फीसदी आँकी गई थी। इस लिहाज से उनके लिए नौकरियों और लोकसभा-विधानसभाओं में उनके लिए 7.5% आरक्षण सुनिश्चित किया जा सका।
इसके बाद आदिवासी हितों की रक्षा के लिए जयपाल सिंह मुंडा ने 1952 में झारखंड पार्टी का गठन किया। 1952 में झारखंड पार्टी को काफी सफलता मिली थी। उसके 3 सांसद और 23 विधायक जीते थे। स्वयं जयपाल सिंह लगातार चार लोकसभा चुनाव जीतकर संसद में पहुँचे थे। बाद में झारखंड के नाम पर बनी तमाम पार्टियाँ उन्हीं के विचारों से प्रेरित हुईं।
पूर्वोत्तर के आदिवासियों में फैले असंतोष को उस समय भी जयपाल सिंह मुंडा पहचान रहे थे। नागा आंदोलन के जनक जापू पिजो को भी उन्होंने झारखंड की ही तर्ज पर अलग राज्य की माँग के लिए मनाने की कोशिश की थी, लेकिन पिजो सहमत नहीं हुए। इसी का नतीजा ये रहा कि आज तक नागालैंड उपद्रवग्रस्त इलाका बना हुआ है।
जयपाल सिंह मुंडा के ही कारण जनजातियों को संविधान में कुछ विशिष्ट अधिकार मिल सके, हालाँकि, व्यवहार में उनका शोषण अब भी जारी है। खासकर, भारतीय जनता पार्टी के शासन वाले राज्यों- छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्यप्रदेश और गुजरात में तो इनके सामूहिक खात्मे का अभियान छिड़ा हुआ है। किसी को भी नक्सली बताकर गोली से उड़ा दिए जाने की परंपरा स्थापित हो चुकी है। यह दुखद स्थिति खत्म करने के लिए एक बार फिर से जयपाल सिंह मुंडा की विचारधारा का अनुसरण किए जाने की जरूरत है। पूरे जीवन आदिवासी हितों के लिए लड़ते-लड़ते 20 मार्च 1970 को जयपाल सिंह मुंडा का निधन हो गया। दुर्भाग्य की बात है कि उसके बाद उन्हें विस्मृत कर दिया गया।
यह दुख की बात है कि आज जब दलितों और पिछड़ों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने वालों को इतिहास के पन्नों से खोजकर निकालकर नया इतिहास लिखने की शुरुआत हो चुकी है, जबकि आदिवासियों के सबसे बड़े हितैषी जयपाल सिंह मुंडा को नई पीढ़ी के लोग जानते तक नहीं हैं। जब छोटे-छोटे राजनीतिक हितों के लिए लड़ने वाले राजनेताओं और धन के लिए खेलने वाले खिलाड़ियों तक को भारत रत्न से सम्मानित किया जा रहा है, ऐसे में जयपाल सिंह मुंडा जैसे बहुआयामी व्यक्ति के लिए भारत रत्न की माँग तक कहीं सुनाई नहीं देता।
Saturday, January 2, 2021
पर्यावरणाचे संवर्धन ही प्रत्येकाची जीवनशैली बनावी – मुख्यमंत्री ‘माझी वसुंधरा ई-शपथ’ उपक्रमाचा मुख्यमंत्र्यांच्या हस्ते शुभारंभ
मुख्यमंत्र्यांसह उपमुख्यमंत्री, महसूल मंत्री, पर्यावरण मंत्री आदी मान्यवरांनी घेतली पर्यावरण संवर्धनाची ई-शपथ
मुंबई, दि. १ : पर्यावरणाचे जतन आणि संवर्धन हा केवळ सरकारी उपक्रम न राहता ती प्रत्येकाची जीवनशैली बनली पाहीजे. ‘माझी वसुंधरा अभियान’ राबविताना यामध्ये प्रत्येकाने सहभाग द्यावा व त्यातून याला लोकचळवळीचे स्वरुप देण्यात यावे, असे आवाहन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे यांनी केले.
पर्यावरण आणि वातावरणीय बदल विभागामार्फत ‘माझी वसुंधरा अभियान’ राबविण्यात येत आहे. या अभियानांतर्गत ‘माझी वसुंधरा ई-शपथ (ई-प्लेज)’ उपक्रम राबविण्यात येणार आहे. मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे यांच्या हस्ते या उपक्रमाचा ऑनलाईन कार्यक्रमात शुभारंभ करण्यात आला, त्यावेळी ते बोलत होते. यावेळी मुख्यमंत्री श्री.ठाकरे यांनी या उपक्रमात सहभागी होत राज्याच्या पर्यावरणाचे संवर्धन करण्यास मी कटीबद्ध राहीन, अशी ई-शपथ घेतली.
कार्यक्रमात उपमुख्यमंत्री अजित पवार, महसूल मंत्री बाळासाहेब थोरात, कौशल्य विकास मंत्री नवाब मलिक, नगरविकास मंत्री एकनाथ शिंदे, पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे, राज्यमंत्री संजय बनसोडे, प्रदूषण नियंत्रण मंडळाचे अध्यक्ष सुधीरकुमार श्रीवास्तव, मुख्यमंत्र्यांचे अपर मुख्य सचिव आशिषकुमार सिंह, पर्यावरण विभागाच्या प्रधान सचिव मनिषा म्हैसकर, प्रदूषण नियंत्रण मंडळाचे सदस्य सचिव अशोक शिनगारे यांच्यासह राज्याच्या विविध भागातून मंत्री, राज्यमंत्री, विभागीय आयुक्त, जिल्हाधिकारी आदी मान्यवर सहभागी झाले होते.

मुख्यमंत्री श्री.ठाकरे म्हणाले की, नव्या वर्षाची सुरुवात कशी करावी याची एक नवीन वाट पर्यावरणाच्या रक्षणासाठी शपथ घेऊन या कार्यक्रमातून दिली गेली आहे. या अभियानातून फक्त देशालाच नव्हे तर जगालाही पर्यावरण संवर्धनाची एक नवीन दिशा मिळेल. कोरोनाच्या संकटाने आपल्याला अनेक गोष्टी शिकविल्या. लॉकडाऊनच्या काळात सर्वच ठिकाणी प्रदुषणामध्ये मोठी घट झाली होती. आपण विकास करताना झाडांची कत्तल करतो आणि तोच विकास झाल्यानंतर रस्त्यांवर ऑक्सीजन मिळविण्यासाठी यंत्राचा वापर करतो. विकासातील हा असमतोल दूर करुन पर्यावरणपुरक अशा शाश्वत विकासाची कास आपल्याला धरावी लागेल. यासाठी राज्यात पर्यावरण आणि वातावरणीय बदल विभागाला संपूर्ण पाठबळ देऊ, असे श्री.ठाकरे यांनी सांगितले.
‘दोन इमारतींच्या मधून उगवणारा सूर्य’
पर्यावरणाच्या होणाऱ्या ऱ्हासाबद्दल मुख्यमंत्री श्री. ठाकरे यांनी काही उदाहरणे दिली. ते म्हणाले की, पुर्वी आम्ही चित्रकला स्पर्धा घेत असू, तेंव्हा उगवणाऱ्या सुर्याचे चित्र काढत असताना अनेक मुले दोन डोंगरांमधून उगवणाऱ्या सुर्याचे चित्र काढत असत. पण आता मुले हेच चित्र दोन इमारतींच्या मधून उगवणाऱ्या सुर्याचे चित्र काढतात. ही परिस्थिती धोकादायक असून नद्या, डोंगर, निसर्ग, पर्यावरण या सर्वांची भावी पिढीसाठी जपणूक करण्याची आपल्या सर्वांची मोठी जबाबदारी आहे, असे श्री.ठाकरे यांनी यावेळी सांगितले.
उपमुख्यमंत्री अजित पवार म्हणाले की, पंचतत्वांना केंद्रस्थानी ठेवून पर्यावरणाच्या जतन आणि संवर्धनासाठी पर्यावरण आणि वातावरणीय बदल विभागाने मोठा पुढाकार घेतला आहे. माझी वसुंधरा अभियानातून याला निश्चितच चालना मिळेल. राज्यात यापुर्वी यशस्वी झालेल्या संत गाडगेबाबा ग्रामस्वच्छता अभियान, महात्मा गांधी तंटामुक्त गाव अभियान याप्रमाणेच माझी वसुंधरा अभियानालाही लोकचळवळीचे स्वरुप द्यावे, त्यात सर्वांनी सहभाग घ्यावा. पर्यावरण रक्षणाच्या कामासाठी निधीची कमतरता भासू दिली जाणार नाही, अशी ग्वाही श्री.पवार त्यांनी यावेळी दिली.

महसूल मंत्री बाळासाहेब थोरात म्हणाले की, वातावरणातील विविध बदलांना सामोरे जात त्यावर मात करुन पर्यावरणाचे रक्षण करण्यासाठी माझी वसुंधरा अभियानातून मोठी चालना मिळेल. वातावरणातील बदल हे मानवतेसमोरील मोठे संकट आहे. या संकटावर मात करण्यासाठी पर्यावरण विभागाने सुरु केलेल्या ई-शपथ उपक्रमात सर्वांनी सहभागी व्हावे. सर्वांनी या नव्या वर्षात पर्यावरण रक्षणाच्या अनुषंगाने किमान एक तरी संकल्प करुन त्याची अंमलबजावणी करावी, असे आवाहन श्री.थोरात यांनी केले.
पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे म्हणाले की, वातावरणातील बदलांमुळे विविध वादळे, अवकाळी पाऊस, कधी दुष्काळ तर कधी अतिवृष्टी अशी विविध संकटे येत आहेत. याचा मानवी जीवनावर मोठा परिणाम होत आहे. राज्यात मागील वर्षभरात अशा विविध आपत्तीग्रस्तांना सुमारे साडेतेरा हजार कोटी रुपयांची मदत देण्यात आली. पण अशी संकटे रोखण्यासाठी आता आपल्याला व्यापक प्रयत्न करावे लागतील. यासाठीच विकास आणि पर्यावरण याचा समतोल साधत पर्यावरणपूरक शाश्वत विकासाचा ध्यास राज्याने घेतला आहे. आरेची जमीन संरक्षीत करणे, १० संरक्षीत वनांची घोषणा, हजारो एकर क्षेत्राचे कांदळवन जाहीर करणे असे विविध निर्णय घेतले जात आहेत. समृद्धी महामार्गाचा पर्यावरणपूरक विकास करण्याला चालना देण्यात येत आहे. आता या चळवळीत सर्वांनी सहभागी होत ई-शपथेच्या माध्यमातून योगदान द्यावे आणि पर्यावरण रक्षणाचा किमान एक संकल्प करुन तो कायम आचरणात आणावा, असे आवाहन श्री.ठाकरे यांनी केले.
पर्यावरण विभागाच्या प्रधान सचिव मनिषा म्हैसकर यांनी कार्यक्रमाचे प्रास्ताविक केले. आजच्या कार्यक्रमात सर्वांनी संकल्प केल्यानुसार माझी वसुंधरा अभियानाला सर्वांच्या सहभागातून लोकचळवळीचे स्वरुप देऊ. पर्यावरण रक्षणाच्या कामात राज्याला आघाडीवर ठेवू. पर्यावरण रक्षण ही सर्वांची हरीत जीवनशैली होईल यासाठी प्रयत्न करताना येत्या 5 जूनपर्यंत अभियानाची गतिमान अंमलबजावणी करु, अशी ग्वाही श्रीमती म्हैसकर यांनी दिली.
प्रदूषण नियंत्रण मंडळाचे अध्यक्ष सुधीरकुमार श्रीवास्तव यांनी या उपक्रमात सहभागी झाल्याबद्दल सर्वांचे आभार मानले. सर्वांनी ई-शपथ घेऊन पर्यावरण रक्षणाच्या चळवळीत सहभागी व्हावे, असे आवाहन त्यांनी केले.
उपमुख्यमंत्री श्री. पवार, महसूल मंत्री श्री. थोरात, पर्यावरण मंत्री श्री. ठाकरे यांच्यासह ऑनलाईन उपस्थित सर्व मंत्री, अधिकारी आदींनी यावेळी ऑनलाईन लॉगीन करुन पर्यावरण संवर्धनासाठी कटीबद्ध असल्याची ई-शपथ (ई-प्लेज) घेतली. या सर्वांना लगेच ऑनलाईन ई-प्रमाणपत्रे प्राप्त झाली. राज्यातील सर्व लोकांनी www.majhivasundhara.in या संकेतस्थळाला भेट देऊन #EPledge या मेनुवर क्लिक करुन ई-शपथ (ई-प्लेज) घ्यावी, असे आवाहन यावेळी करण्यात आले.